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देसावर का वरन किया


दुग्ध दीवि की आश में देसावर का वरन किया,
जब द्रावण की दशा आई, अपने दंभ को दंदश तले पाया !

दिव्या पाने की दंभ में दिवाली का दिया जला ना पाया,
जब दूज की वोह रात आई, अपनी दध को दानक होते पाया !

दरथ करने की दरक में कभी दर्पण का दर्शन ना किया,
जब दक्ष प्रश्न सामने आया अपनी दमक का दलन होते पाया !



एक कहानी अधूरी सी


एक कहानी अधूरी सी
एक रिश्ता बेनाम सा
एक ज़िन्दगी गुमनाम सी
एक ख्वाईस अनजानी सी


सोचा चलो मिल कर
पूरी कर ले इस कहानी को
नाम दे दे इस रिश्ते को
ढूंढ ले अपनी ज़िन्दगी को
अंजाम दे ले अपनी ख्वाईसों को


पर देखो तो मेरी मजबूरी
कहानी क्या होगी ये पूरी
रिश्ते का कुछ तो नाम होगा
ज़िन्दगी क्या ऐसे खो जाएगी
ख्वाईसें क्या यूँही ख़तम हो जाएँगी


सवालो से उलझी ये कहानी
बेड़ियों से बंधा ये रिश्ता
अंधेरो में खोई ये ज़िन्दगी
शायाद अनजानी रह जाएँगी ख्वाईसें….



उठो नया इतिहास लिखो

……………
उठो नया इतिहास लिखो
चिन्मय निद्रा से जागो
कुछ जीने का एहसास करो
अर्थी नहीं तुम सारथि बनो
मूषक की गति को छोडो
शेर की दहाड़ बनो
रार करो तकरार करो
कुछ जीने का एहसास करो

कवी बनो तुम रवि बनो
डर को पीछे छोड़ कर
संघर्ष को स्वीकार करो
हटो नहीं तुम डटे रहो
सुख का तिरस्कार करो
कुछ जीने का एहसास करो


उठो नया इतिहास लिखो
चिन्मय निद्रा से जागो
कुछ जीने का एहसास करो



अभी तो एक तूफ़ान आना बाकि था

………
दिल के कोरे कागज़ पे एक नाम लिखना बाकि था
उनकी आँखों में बस थोडा सा प्यार देखना बाकि था
हमने तो समझा था की हमारी कहानी ख़त्म हो गयी
लेकिन अभी तो एक तूफ़ान आना बाकि था

बुझी सी चाहत को थोडा करार देना बाकि था
उनकी यादो को बस थोडा सा बिराम देना बाकि था
प्यार भरे वादों की आदत हमने भुला दी थी
लेकिन अभी तो आशाओं का एक जहां आना बाकि था

रिश्तों के सफ़र में एक पड़ाव आना बाकि था
तपती गर्मी के बाद सावन की फुहार आना बाकि था
मिठास की कल्पना तो हम पीछे छोड़ आये थे
लेकिन उनके होठों पे हमारा अभी नाम आना बाकि था

दिल के अरमानों की उड़ान अभी बाकि थी
भीगी आँखों पे चाहत की मुस्कान अभी बाकि थी
ये तो बस मौसम बदलने की शुरुवात थी
लेकिन अभी तो एक तूफ़ान आना बाकि था


वो मेरी महबूबा है..

चाँद सी मोहक अदाएं हैं जिसकी,
वो मेरी महबूबा है,
चन्दन सा आकर्षण और कुमकुम    सी  कोमलता है जिसकी
वो मेरी महबूबा है !

दीप सी दमकती आभा है जिसकी
वो मेरी महबूबा है,
सलोनी सी सूरत और तुलसी सी    पवित्रता है जिसकी,
वो मेरी महबूबा है !

हिम सी शीतलता है जिसमें
नीर सी चंचलता है उसमें
कोयल सी आवाज़ वाली
वो मेरी महबूबा है,
वो मेरी महबूबा है !

कनक सा कलेवर है जिसका
नीलम सा निखार है उसका
मधु सी मिठास वाली
वो मेरी महबूबा है
वो मेरी महबूबा है !

चाँद सी मोहक अदाएं हैं जिसकी
वो मेरी महबूबा है
वो मेरी महबूबा है !!



अपना साथी जो था !!

समय के सफ़र में प्रहर जब रात का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !

मंजिल की दौर में प्रहर जब हार का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !

जीत की ख़ुशी में, हार के गम में,
याद आ गया वो अपना साथी जो था !

मन के अन्तः करण में जब प्यार को संजोया,
याद आ गया वो अपना साथी जो था !

नित्य कृत पर्व में, गर्त में, प्रशाध्य में,
श्रीन्खलाय मार्ग में, ज्ञान के प्रवाह में,
सांख्य स्मृति में, जीवन के अध्याय में,
हर पल के बहाव में,
याद आ गया वोह अपना साथी जो था,
याद आ गया वोह अपना साथी जो था !

मेघ के प्रवाह में प्रहर जब वेदना का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !

समय के सफ़र में प्रहर जब हार का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !!



जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है..


प्यार के बगिये में फूलों को यूँही खिलाते जाना है,
जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है !


सावन की फुहार में, चांदनी रातों में,
पतझड़ के मौसम में और सर्दी की ठंढ में,
हर दिन हर पल गीत नए गाना है,
दिल के गलियारे में, यादों को सजाना है !

तुम्हारी चहचहाती हंसी और मद भरी आँखों से,
हर दिन सरगम के नए छंद कोई गुनगुनाना है,
हर राह हर सफ़र हसते हुए बीतना है,
जीवन के हर छन को यूँही रंगीन बनाना है !

प्यार के बगिये में फूलों को यूँही खिलाते जाना है,
जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है !



जब तुम साथ थे..

खुबसूरत थे वोह पल जब तुम साथ थे

मासूम थे वोह पल जब तुम साथ थे

नाज़ था हमे खुद पे जब तुम साथ थे

जलते थे लोग हमसे जब तुम साथ थे


आजकल तो बस हम खयालो में रहते है

दुनिया की हर खबर से बेखबर रहते हैं

लोग कहते हैं आजकल हम पागल से दीखते हैं


कुछ तो था जो बदल गया

सुबह की वोह मीठी बातें हमे आज भी सताती है

शाम की वोह तीखी बातें दिल को दुखाती हैं

कोई साथी तो था जो बदल गया


भीड़ में भी खुद को तनहा पाते हैं,

जब याद आते हैं वोह पल, जब तुम साथ थे

महफिल में भी रुला जाते हैं

जब याद आते हैं वोह पल, जब तुम साथ थे



~~ आई होली करो तुम धमाल ~~

आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा 
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा 

प्रीत के संग छेडो तराने
 कुछ लम्हे पुराने 
और गाओ सा रा रा रा 

आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा 
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा 

महकते फूलों की शोभा बढाओ 
इस बेला में..  
इस बेला में उनको भी थोडा सहलाओ 
और गाओ..  
और गाओ सा रा रा रा 

थोडी गीली उनकी हथेली कराओ 
रस वालों को..
रस वालों कों थोडा सा रस तुम चखाओ 
और गाओ… 
और गाओ सा रा रा रा 

आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा 

चंपा के संग चमेली को भी नेहलाओ 
रग रग में रंगों की धार बहाओ 
और गाओ.. 
और गाओ सा रा रा रा 

आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा ..


~~ वो सबसे प्यारी है ~~

ख्वाबो की क्यारी है
फूलो से न्यारी है
रात की चाँदनी
चकोर की दीवानगी
और सपनो की रवानगी है

पल में जीना पल में भुझना
दर्पण के जैसी नादानी है
दिल के पुस्तक की कोई कविता
और सौंदर्य को चित्रित करती कोई सरिता है

परी के जैसी सुन्दरता है
और बुलबुल के जैसी चंचलता है
कहने को तो पुरा जहाँ कम है
हम तो सिर्फ़ इतना कहेंगे की
वो सबसे प्यारी है
वो सबसे प्यारी है