March 31, 2012 - Posted by admin - 0 Comments
दुग्ध दीवि की आश में देसावर का वरन किया,
जब द्रावण की दशा आई, अपने दंभ को दंदश तले पाया !
दिव्या पाने की दंभ में दिवाली का दिया जला ना पाया,
जब दूज की वोह रात आई, अपनी दध को दानक होते पाया !
दरथ करने की दरक में कभी दर्पण का दर्शन ना किया,
जब दक्ष प्रश्न सामने आया अपनी दमक का दलन होते पाया !
March 21, 2012 - Posted by admin - 0 Comments
एक कहानी अधूरी सी
एक रिश्ता बेनाम सा
एक ज़िन्दगी गुमनाम सी
एक ख्वाईस अनजानी सी
सोचा चलो मिल कर
पूरी कर ले इस कहानी को
नाम दे दे इस रिश्ते को
ढूंढ ले अपनी ज़िन्दगी को
अंजाम दे ले अपनी ख्वाईसों को
पर देखो तो मेरी मजबूरी
कहानी क्या होगी ये पूरी
रिश्ते का कुछ तो नाम होगा
ज़िन्दगी क्या ऐसे खो जाएगी
ख्वाईसें क्या यूँही ख़तम हो जाएँगी
सवालो से उलझी ये कहानी
बेड़ियों से बंधा ये रिश्ता
अंधेरो में खोई ये ज़िन्दगी
शायाद अनजानी रह जाएँगी ख्वाईसें….
February 4, 2011 - Posted by admin - 0 Comments
……………
उठो नया इतिहास लिखो
चिन्मय निद्रा से जागो
कुछ जीने का एहसास करो
अर्थी नहीं तुम सारथि बनो
मूषक की गति को छोडो
शेर की दहाड़ बनो
रार करो तकरार करो
कुछ जीने का एहसास करो
कवी बनो तुम रवि बनो
डर को पीछे छोड़ कर
संघर्ष को स्वीकार करो
हटो नहीं तुम डटे रहो
सुख का तिरस्कार करो
कुछ जीने का एहसास करो
उठो नया इतिहास लिखो
चिन्मय निद्रा से जागो
कुछ जीने का एहसास करो
May 24, 2010 - Posted by ambuj - 3 Comments
………
दिल के कोरे कागज़ पे एक नाम लिखना बाकि था
उनकी आँखों में बस थोडा सा प्यार देखना बाकि था
हमने तो समझा था की हमारी कहानी ख़त्म हो गयी
लेकिन अभी तो एक तूफ़ान आना बाकि था
बुझी सी चाहत को थोडा करार देना बाकि था
उनकी यादो को बस थोडा सा बिराम देना बाकि था
प्यार भरे वादों की आदत हमने भुला दी थी
लेकिन अभी तो आशाओं का एक जहां आना बाकि था
रिश्तों के सफ़र में एक पड़ाव आना बाकि था
तपती गर्मी के बाद सावन की फुहार आना बाकि था
मिठास की कल्पना तो हम पीछे छोड़ आये थे
लेकिन उनके होठों पे हमारा अभी नाम आना बाकि था
दिल के अरमानों की उड़ान अभी बाकि थी
भीगी आँखों पे चाहत की मुस्कान अभी बाकि थी
ये तो बस मौसम बदलने की शुरुवात थी
लेकिन अभी तो एक तूफ़ान आना बाकि था
January 31, 2010 - Posted by ambuj - 6 Comments
चाँद सी मोहक अदाएं हैं जिसकी,
वो मेरी महबूबा है,
चन्दन सा आकर्षण और कुमकुम सी कोमलता है जिसकी
वो मेरी महबूबा है !
दीप सी दमकती आभा है जिसकी
वो मेरी महबूबा है,
सलोनी सी सूरत और तुलसी सी पवित्रता है जिसकी,
वो मेरी महबूबा है !
हिम सी शीतलता है जिसमें
नीर सी चंचलता है उसमें
कोयल सी आवाज़ वाली
वो मेरी महबूबा है,
वो मेरी महबूबा है !
कनक सा कलेवर है जिसका
नीलम सा निखार है उसका
मधु सी मिठास वाली
वो मेरी महबूबा है
वो मेरी महबूबा है !
चाँद सी मोहक अदाएं हैं जिसकी
वो मेरी महबूबा है
वो मेरी महबूबा है !!
January 16, 2010 - Posted by ambuj - 5 Comments

समय के सफ़र में प्रहर जब रात का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !
मंजिल की दौर में प्रहर जब हार का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !
जीत की ख़ुशी में, हार के गम में,
याद आ गया वो अपना साथी जो था !
मन के अन्तः करण में जब प्यार को संजोया,
याद आ गया वो अपना साथी जो था !
नित्य कृत पर्व में, गर्त में, प्रशाध्य में,
श्रीन्खलाय मार्ग में, ज्ञान के प्रवाह में,
सांख्य स्मृति में, जीवन के अध्याय में,
हर पल के बहाव में,
याद आ गया वोह अपना साथी जो था,
याद आ गया वोह अपना साथी जो था !
मेघ के प्रवाह में प्रहर जब वेदना का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !
समय के सफ़र में प्रहर जब हार का आया,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था,
कोई भूल गया वो अपना साथी जो था !!
December 9, 2009 - Posted by ambuj - 2 Comments
प्यार के बगिये में फूलों को यूँही खिलाते जाना है,
जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है !
सावन की फुहार में, चांदनी रातों में,
पतझड़ के मौसम में और सर्दी की ठंढ में,
हर दिन हर पल गीत नए गाना है,
दिल के गलियारे में, यादों को सजाना है !
तुम्हारी चहचहाती हंसी और मद भरी आँखों से,
हर दिन सरगम के नए छंद कोई गुनगुनाना है,
हर राह हर सफ़र हसते हुए बीतना है,
जीवन के हर छन को यूँही रंगीन बनाना है !
प्यार के बगिये में फूलों को यूँही खिलाते जाना है,
जीवन के दर्पण में रंगों को भरते जाना है !
June 19, 2009 - Posted by ambuj - 1 Comment
खुबसूरत थे वोह पल जब तुम साथ थे
मासूम थे वोह पल जब तुम साथ थे
नाज़ था हमे खुद पे जब तुम साथ थे
जलते थे लोग हमसे जब तुम साथ थे
आजकल तो बस हम खयालो में रहते है
दुनिया की हर खबर से बेखबर रहते हैं
लोग कहते हैं आजकल हम पागल से दीखते हैं
कुछ तो था जो बदल गया
सुबह की वोह मीठी बातें हमे आज भी सताती है
शाम की वोह तीखी बातें दिल को दुखाती हैं
कोई साथी तो था जो बदल गया
भीड़ में भी खुद को तनहा पाते हैं,
जब याद आते हैं वोह पल, जब तुम साथ थे
महफिल में भी रुला जाते हैं
जब याद आते हैं वोह पल, जब तुम साथ थे
March 10, 2009 - Posted by ambuj - 4 Comments
आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा
प्रीत के संग छेडो तराने
कुछ लम्हे पुराने
और गाओ सा रा रा रा
आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा
महकते फूलों की शोभा बढाओ
इस बेला में..
इस बेला में उनको भी थोडा सहलाओ
और गाओ..
और गाओ सा रा रा रा
थोडी गीली उनकी हथेली कराओ
रस वालों को..
रस वालों कों थोडा सा रस तुम चखाओ
और गाओ…
और गाओ सा रा रा रा
आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा
चंपा के संग चमेली को भी नेहलाओ
रग रग में रंगों की धार बहाओ
और गाओ..
और गाओ सा रा रा रा
आई होली करो तुम धमाल और गाओ सा रा रा रा
रंग डालो उडाओ गुलाल और गाओ सा रा रा रा ..
January 3, 2009 - Posted by ambuj - 2 Comments
ख्वाबो की क्यारी है
फूलो से न्यारी है
रात की चाँदनी
चकोर की दीवानगी
और सपनो की रवानगी है
पल में जीना पल में भुझना
दर्पण के जैसी नादानी है
दिल के पुस्तक की कोई कविता
और सौंदर्य को चित्रित करती कोई सरिता है
परी के जैसी सुन्दरता है
और बुलबुल के जैसी चंचलता है
कहने को तो पुरा जहाँ कम है
हम तो सिर्फ़ इतना कहेंगे की
वो सबसे प्यारी है
वो सबसे प्यारी है